Wednesday, November 6, 2013

क्या लिखुँ

क्या लिखूं ? जो गूढ़ हो .
ज्ञान पर आरूढ़ हो .
पुष्टि मांगती है मेधा
सिद्ध हो या मूढ़ हो .


क्या लिखूं ? जो छंद हो
सद चित हो, आनंद हो
मन पे ऐसा हो असर
ज्यों जीभ पर मकरंद हो ,


क्या लिखूं ? जो राग हो .
विराग हो ,अनुराग हो
कौन्तेय जैसा धर्मधारी
 कृष्ण सा बीतराग हो .


क्या लिखूं ? जो स्वस्ति हो .
हो भक्ति या , विरक्ति हो
प्रदक्षिणा हो ज्ञान की
नैराश्य , न आसक्ति हो .

.
 वह लिखूं जो सुविचार हो
सगुण और निर्विकार हो 
द्वेष दम्भ अतिरंजित न हो 
 हो  न्यून पर ओंकार हो .

20 comments:

  1. likhiye , likhiye bas likhiye .. aisa hi sundar sundar :)

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  2. आपके लिखे को हम बस पढ़ सकते हैं, टिप्पणी हमारे बूते नहीं :)

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  3. itna to likh diya.....
    aur bhi kuch likhna hain kya baaki....:)
    main mukesh ji ki baat se sehmat hun

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  4. क्या लिखूँ , जो टिपप्णी हो
    सार्थक और संक्षिप्त हो
    मैं वह लिखूँ ,जो मनभाई हो
    या मेरे मन में आयी हो
    बस यही बताओ ,जब पहले ही
    इतनी अच्छी लिखी गयी हो
    मैं क्या लिखूँ ,क्या - क्या लिखूँ :)

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  5. बहुत ही खुबसूरत ख्यालो से रची रचना......

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  6. हमेशा की तरह बेजोड़ अभिव्यक्ति

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  7. स्वस्ति व संपूर्णता लिए सुवासित होते सगुण सुविचार एवं सद्भाव ....!!सुंदर संरचना ....!!

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  8. नमन आपकी लेखनी को .आप लिखिए बस हम पढ़ते रहे

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  9. सही ही कहा है ....कि क्या लिखूँ ...
    ऐसी कोई सटीक टिपण्णी नहीं जो ..अभी की जा सके
    बेजोड लेखनी ...बहुत खूब

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  10. जब त्रिपथगा स्याही बनके लेखनी में जा समाये
    जब कोई ध्रुव तारा तुमको आके खुद राहें सुझाये
    सोचना क्या चाँदनी जब कागज़ों पर फैल जाए
    जो लिखोगे शुभ ही होगा व्यर्थ संशय मन में आये

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  11. बहुत ही सुन्दर छंदबद्ध रचना है ....... शुभकामनाएं

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  12. जो चाहे लिखिए....आपकी लेखनी में शहद भरा है...मिठास से इतर कुछ न लिखाया जाएगा.....
    अनु

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  13. वीणापाणी के आशीष से
    गर्वित सदा ये शीश है
    लिखा वही जो अशेष है
    बोलो प्रश्न क्यूँ फिर शेष है ?
    लिखते रहिये और हम सब के मनोमस्तिष्क को तृप्त करते रहिये… स्नेहाशीष भाई

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  14. http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/अंक ४१ शुक्रवारीय चौपाल में आपकी रचना को शामिल किया गया हैं कृपया अवलोकन हेतु अवश्य पधारे ..धन्यवाद

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  15. वह लिखूं जो सुविचार हो !
    उम्दा विचार !

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  16. आशीष बहुत सुन्दर लिखते हो ...कहती तो अनुज हूँ ..पर तुम्हारे लेखन के आगे नत मस्तक हूँ...!!सच...!!!!

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  17. कथ्य, शिल्प, भाव, लय ... सभी कुछ इतना लाजवाब की बस ... एक ही भाव अद्वितीय ...

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  18. इस ओंकार का गूंज रहा है नाद..

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