Thursday, October 3, 2013

क्यों


छल छल करती सरिता में क्यों 
छलका करुण प्रवाह? 
निर्झर क्यों झर झर बिखराता
नयन नीर का वाह ?




लतिका के नत आनन पर क्यों ? 
झलका अन्तर्दाह ?
तरु क्यूँ पत्र -अधर -कम्पन से 
भरते नीरव आह ?




सांध्य गगन की मलिनाकृति से 
क्यों प्रकटित अवसाद ?
श्यामल भूधर झींगुर रव मिष
क्यों करते दुःख नाद ?

18 comments:

  1. ह्रदय की पीड़ा से उपजे प्रश्नों के उत्तर कौन देगा आखिर ??
    बेहतरीन कविता !!

    अनु

    ReplyDelete
  2. भव्य और आकर्षक चेतनामयी प्रकृति के पीड़ित ह्रदय का जीवंत चित्रण ..... एक -एक शब्द जैसे दिल में उतर गया ... बधाई .. :)

    ReplyDelete
  3. क्या कहने ... अद्भुत

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर कविता ......

    ReplyDelete
  5. हृदयस्पर्शी भाव ।
    असीम वेदना झलकाती उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ....!!संग्रहणीय रचना है ....आशीष भाई ...!!बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  6. वाह ...उम्दा

    कुछ प्रश्नों के उत्तर कभी नहीं मिलते

    ReplyDelete
  7. खुबसूरत अभिवयक्ति......

    ReplyDelete
  8. सुन्दर सृजन. अच्छा लगा आपकी कविता पढकर.

    ReplyDelete
  9. अति सुंदर ..... प्रवाहमयी भाव

    ReplyDelete
  10. जब निर्झर झरता रहता है तो
    ये ' क्यों '' ही थामे भी रहता है..

    ReplyDelete
  11. प्रकृति का मानवीकरण

    ReplyDelete
  12. गूढ़ प्रश्न, बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  13. वाह, खूबसूरत,लाजवाब रचना.

    ReplyDelete
  14. प्रवाहमय ... कल कल बहती हुई सी ... सुन्दर रचना ...

    ReplyDelete