Thursday, July 11, 2013

बधशाला -11


किस का मुंह पकड़ा जाता है , जो चाहा सो कह डाला
दिल पर रख के हाथ जरा तो , सोचे कोई दिलवाला 
जिसे समझते जुल्म ! यही है. मूल मंत्र आजादी का 
रूह जिस्म में कैद , उसे , आजाद कराती बधशाला

जीवन को आदर्श बनाये , विश्व प्रेम का पी प्याला 
हिम्मते मर्द  मदद ख़ुदा की ,सदा गान करने वाला 
ताल ठोक चढ़ जाये जो . अमर ध्येय की सीढ़ी पर 
ऐसे ही वीरों का स्वागत , करती मेरी बधशाला 

परहित जो पीड़ा सहता है, होता कोई दिलवाला 
है आनंद उसी में उसको. जीवन सुखद बना डाला
जग में जितने हुए सुधारक , अब है या आगे होंगे 
चले धार पर तब सुधार का , पाठ पढ़ाती बधशाला .

16 comments:

  1. शब्दों की पीड़ा तो शारीरिक पीड़ा से कहीं अधिक होती है..सुन्दर और प्रभावशाली वर्णन।

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  2. bahut badhiya.... prerna deti

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  3. चले धार पर तब सुधार का , पाठ पढ़ाती बधशाला ......अनुशासन हर जगह आवश्यक है .... सुन्दर पंक्तियाँ .. :)

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  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(13-7-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  5. बहुत ही बढ़िया ..... प्रेरणादायक

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  6. पाठ पढ़ाती बधशाला......
    बहुत बढ़िया....

    अनु

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  7. ताल ठोक चढ़ जाये जो . अमर ध्येय की सीढ़ी पर
    ऐसे ही वीरों का स्वागत , करती मेरी बधशाला
    अद्भुत , अतुलनीय है आपकी वधशाला.

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  8. और आगे बढ़ो ....एक अद्दभुत संग्रह की ओर अग्रसर हो

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  9. जीवन को आदर्श बनाये , विश्व प्रेम का पी प्याला
    हिम्मते मर्द मदद ख़ुदा की ,सदा गान करने वाला
    ताल ठोक चढ़ जाये जो . अमर ध्येय की सीढ़ी पर
    ऐसे ही वीरों का स्वागत , करती मेरी बधशाला

    Lagta hai padhtee hee chali jaun....

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  10. बहुत उम्दा...बहुत बहुत बधाई...

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  11. धार पर चले बिना सुधार कहाँ?

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