Thursday, September 4, 2014

बधशाला -18





हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, कोई भी हो मतवाला 
जात पात और छुआ छूत का , यहाँ नहीं परदा काला
इसी घाट से राजा उतरे , यही रंक के लिए खुला 
भेद भाव को भूल सभी को , एक बनाती बधशाला.


तेरा इनका जिस्म एक सा , रंग रूप भी है आला
ये भी बेटे उसी पिता के , है जिसने तुझको पाला
एक बाप की संताने क्या , नहीं प्रेम से रहती है 
मिलो गले से और खोल दो , छुआ छूत की बधशाला .


मृगनयनी को छोड़ अरे तू , दाब बगल में मृगछाला 
आसन मार बैठ मरघट में , वीर मुंड के लै माला
सत्यम शिवम् सुन्दरम का तू , जाप किये जा ध्यान लगा 
तब जग के कण कण में तुझको , दिख पड़ेगी बधशाला 

Monday, August 11, 2014

बधशाला -17


मेरे शव को हाथ लगाये , जिसके कर में छाला 
मेरी अर्थी में, घायल जो , हो कन्धा देने वाला 
जिसके दिल में आग लगी हो , वही चिता मेरी फूंके 
कर्म करे तो बांध कफ़न सर , सीधे जाये बधशाला 


गर्म रक्त से ! मेरा तर्पण , हो कोई करने वाला 
सहसबाहु का परशुराम ने , जैसे वंश मिटा डाला 
तृप्त आत्मा होगी मेरी , कहीं जुल्म का नाम न हो 
जहाँ मिले कोई भी जालिम , वहीँ खोल दो बधशाला 


जो कुछ समझा मैंने उतना, वीरों का यश लिख डाला 
क्षमा करो अपराध ! भूल है , नहीं है मेरा दिल काला 
रहे शेष जो उनकी पदरज , निज मस्तक पर धरता हूँ 
देश धर्म हित खोल चुके , या देख चुके जो बधशाला

Saturday, July 12, 2014

मंगई की छाती

बिन बरसा आषाढ़ 
आंसू हो गए गाढ़
होठो में फटी बिवाई 
अब हंसने को तरस रहे.


फुहारों की छुवन अब कहाँ 
अंगो में सिहरन अब कहाँ 
देखे मेढ़ो को टुकुर टुकुर 
नैना सुखने को तरस रहे.


सन्नाटा है घर बार में 
अंखुआ सूख गए बंसवार में.
कातिक में कैसे खेत बुवाई 
बैल नधने को तरस रहे .


फटी हुई है मंगई की छाती
घर में भूजी भाँग है थाती 
आशा भी अब अस्ताचल को 
पौ फटने को तरस रहे .

Monday, June 23, 2014

विफल जीवन

ह्रदय कानन में अब फूल खिलते 
सुमन रंजित राग विचित्र से 
मधुर मोहक सौरभ संग से 
अति सुवास रहे नित ही यहाँ 


या नवीन अनुपम मोहिनी 
यद्दपि थी खिलती कुसुमावली
पर निरर्थक ही रह के सदा 
सकुच पुष्प गिरै सब भूमि पे 


मधुर सौरभ सूंघ न थे किये 
सकल पुष्प किसी सुरसज्ञ ने 
सुखित नेत्र ना समझे कमी 
निरख चित्र सुराग समूह को 


मुकुल सादर कंठ प्रदेश में 
रुचिर माला बना पहिने नहीं 
विफल जीवन था उनका हुआ 
रहित होकर एक गुणज्ञ से .

Monday, May 26, 2014

प्रार्थना


छिपी हुई वो तेज राशि
आ ! अंतर आलोकित कर दे 
दुर्बलता के सघन तिमिर में 
ज्योतिर्मयी आभा भर दे


संपुट दुविधा का खोल लूँ 
प्रज्ञा हो अंतर्मन के लोल में 
तामस -तमस को घोल दूँ 
हो सुधा शाद्वल इस खगोल में 


अपना भूला मार्ग खोज लूँ
जिधर छिपी रत्नों की खान 
उनमे से एक दो बीन लूँ
आत्मिक बल , जाग्रति , उत्थान .

Thursday, December 26, 2013

बधशाला -16


श्री कृष्ण का सर्व प्रथम , जब था पूजन होने वाला 
क्रोधित हो यह देख, गालियाँ लगा सुनाने मतवाला 
अरे बोल वह कब तक सुनता , सुनली उसकी सौ गाली
वही राजसूय यज्ञ बना , शिशुपाल दुष्ट की बधशाला





हाथ कफ़न से बाहर कर दो,ह्रदय नहीं मेरा काला
देखे दुनिया ! खाली हाथो , जाता है जाने वाला 
कहा सिकंदर ने मरते दम , मेरे गम में मत रोना 
वे ही रोये जिनके घर में , नहीं खुली हो बधशाला






गिरा गोद में घायल पक्षी , आतुर होकर देखा भाला
वहां बधिक आ गया भूख से , था व्याकुल मरने वाला
जीवन मरण आज गौतम को.,खूब समझ में आया था
किस पर दया करूँ! क्या दुनिया , इसी तरह है बधशाला





Tuesday, November 26, 2013

बधशाला -15

हिंसा से हिंसा बढती है , पीयो प्रेम रस का प्याला 
नफरत से नफरत को वश में , अरे कौन करने वाला 
"बापू" के हित अगर तुम्हारी , आँखों में कुछ आंसू है 
बंद करो लड़ाई,मत  खोलो , हिन्दू मुस्लिम बधशाला.



मंदिर तोड़ मुसलमां सहसा , बोल उठा अल्ला ताला
मस्जिद फूंक और हिन्दू का , बजा शंख घंटा आला 
जान न पाए दोनों पागल , उसके नाम अनेकों है ,
किया धर्म बदनाम खोल , रहमान राम की बधशाला.



नाच गया किसकी थापों पर , जिन्ना होकर मतवाला 
किसके सगे हुए ये गोरे, रहा हमेशा दिल काला
"क्रिप्स" लगाकर आग हिन्द में , सात समुन्दर पर गया 
बजा रहा था "चर्चिल" ट्रम्पेट , देख हमारी बधशाला