महापुरुष जो भी जब आया , जग को समझाने वाला
निष्ठुर जग ने , उसे न जाने , किस किस विपदा में डाला
अपनी अपनी कह कर कितने , चले जायेंगे ! चले गए
बनी रहेगी पागल दुनिया , बनी रहेगी ! बधशाला.
कपडे रंग डाले तो क्या है, दिल तो है तेरा काला
बैठ जनाने घाट जपे क्या , राम नाम की तू माला
छोड़ चुका घर बार अरे ! , तो फिर कैसे चेला चेली
हाय गंग के तीर खोल दी , राम नाम की बधशाला
आग लगा दे जटा जूट में ,फेंक कमंडल मृग छाला
जीता जल जा ! कर्मवीर हो ,कर्मयोग में मतवाला
इससे बढ़कर तपोभूमि क्या , तुझे मिलेगी दुनिया में
खाक रमाले, रम जाएगी , रोम रोम में बधशाला .
निष्ठुर जग ने , उसे न जाने , किस किस विपदा में डाला
अपनी अपनी कह कर कितने , चले जायेंगे ! चले गए
बनी रहेगी पागल दुनिया , बनी रहेगी ! बधशाला.
कपडे रंग डाले तो क्या है, दिल तो है तेरा काला
बैठ जनाने घाट जपे क्या , राम नाम की तू माला
छोड़ चुका घर बार अरे ! , तो फिर कैसे चेला चेली
हाय गंग के तीर खोल दी , राम नाम की बधशाला
आग लगा दे जटा जूट में ,फेंक कमंडल मृग छाला
जीता जल जा ! कर्मवीर हो ,कर्मयोग में मतवाला
इससे बढ़कर तपोभूमि क्या , तुझे मिलेगी दुनिया में
खाक रमाले, रम जाएगी , रोम रोम में बधशाला .